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1. जन्म और संरक्षण: राजा गोपीचंद, राजा भर्तृहरि की बहन मैनावती के इकलौते पुत्र थे।

2. वैराग्य का कारण: गुरु गोरखनाथ के प्रभाव में आकर या अपनी माँ की शिक्षाओं से प्रेरित होकर, गोपीचंद को सांसारिक जीवन से विरक्ति हो जाती है। वे गुरु गोरखनाथ से दीक्षा लेते हैं और संन्यास ग्रहण करते हैं।

3. महल में भिक्षा: साधु बनने के बाद, गुरु गोरखनाथ गोपीचंद को अपनी पत्नी पाटमदेवी से भिक्षा माँगने का आदेश देते हैं।

4. माँ का वियोग: महल के द्वार पर जब गोपीचंद भिक्षा माँगते हैं, तो उनकी माँ और रानियाँ उन्हें पहचानकर विलाप करती हैं और उन्हें घर लौटने का आग्रह करती हैं।

5. पुन: घर लौटना: रानियों और माँ के आग्रह के बावजूद, गोपीचंद गुरु के आदेश का उल्लंघन नहीं करते और डेरे में लौट आते हैं।

6. संसार का त्याग: माँ की बात सुनकर गोपीचंद अपना सारा राजपाट छोटे भाई को सौंप देते हैं और वन में योग साधना के लिए चले जाते हैं।

राजा गोपीचन्द भृतहरि ट्रस्ट न्यूज़

  • 1. गरीब असहाय बच्चों, वृद्धों व महिलाओं की सेवार्थ बालआश्रम, वृद्धाश्रम व महिला आश्रमों, अनाथ आश्रम का संचालन करना।
  • 2. गरीब विधवा व परित्यक्ता महिलाओं को आत्मा निर्भर बनाने हेतु विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन करना।
  • 3. जाति, लिंग, नस्ल और रंग भैद के बिना मानवता के विकास के लिए कार्य करना।
  • 4.जल पर्यावरण संरक्षण हेतु कार्य करना, वृक्षारोपण कार्यक्रमों का आयोजन करवाना।
  • 5.रक्तदान शिविर का आयोजन करवाना ब्लड बैंक, आई बैंक का संचालन करना।
  • 6.सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम हेतु यातायात नियमों की जानकारी देना एवं सड़क सुरक्षा कार्यक्रमों में सरकार का सहयोग करना।
  • 7.गरीब व असहायत बच्चों को शिक्षा प्राप्ति में सहयोग करना तथा विभिन्न स्तर के शिक्षण संस्थाओं का संचालन करना। स्कूल, कॉलेज का संचालन करना।
  • 8.सामूहिक विवाह सम्मेलन का आयोजन करना। तथा गरीब व असहाय कन्याओं का विवाह में सहायता करना।
  • 9.गौसेवार्थ कार्य करना तथा गौ पालन हेतु गौ-शालाओं का संचालन करना।

हमारी गौशाला

राजा गोपीचन्द भृतहरि ट्रस्ट, बगरु

1. गरीब असहाय बच्चों, वृद्धों व महिलाओं की सेवार्थ बालआश्रम, वृद्धाश्रम व महिला आश्रमों, अनाथ आश्रम का संचालन करना।

2. गरीब विधवा व परित्यक्ता महिलाओं को आत्मा निर्भर बनाने हेतु विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन करना।

3. गरीब व असहायत बच्चों को शिक्षा प्राप्ति में सहयोग करना तथा विभिन्न स्तर के शिक्षण संस्थाओं का संचालन करना। स्कूल, कॉलेज का संचालन करना।

मंदिर ट्रस्ट दान का विवरण

मंदिर दानकर्ता सूची इतिहास